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| 05 Sep | -- | -- | -- | -- | -- | -- | -- | -- | -- | -- | -- | -- |
| 04 Sep | 95 | 27 | 48 | 80 | 18 | 83 | 01 | 02 | 10 | 95 | 26 | 72 |
| 03 Sep | 57 | 73 | 73 | 78 | 88 | 41 | 20 | 08 | 50 | 32 | -- | 55 |
| 02 Sep | 69 | 57 | 25 | 58 | 52 | 48 | 54 | 19 | 97 | 85 | 96 | 21 |
| 01 Sep | 90 | 81 | 13 | 25 | 58 | 22 | 89 | 45 | 95 | 86 | 81 | 92 |
Satta King (सट्टा किंग) या Satta Matka (सट्टा मटका) भारत का एक बेहद प्रसिद्ध और पारंपरिक अंक-आधारित लॉटरी खेल है। इस खेल का नाम मूल रूप से "सट्टा" (जिसका अर्थ सट्टेबाजी या जुआ है) और "किंग" (जो सबसे बड़े विजेता को कहा जाता है) से मिलकर बना है।
यह खेल पूरी तरह से संख्याओं के चयन और भाग्य पर आधारित है। खेल की शुरुआत में, खिलाड़ी 00 से 99 के बीच अपनी पसंद का कोई भी अंक चुनते हैं और उस पर अपनी मर्जी के अनुसार राशि का दांव लगाते हैं। इसके बाद, उस विशेष खेल के निर्धारित समय पर सट्टा मटका संचालकों द्वारा एक रैंडम (यादृच्छिक) लकी नंबर घोषित किया जाता है। यदि किसी खिलाड़ी द्वारा चुना गया अंक घोषित अंक से मेल खा जाता है, तो उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है और वह एक बड़ी राशि जीतता है।
सट्टा मटका का इतिहास काफी पुराना और दिलचस्प है, जो भारत की आजादी से भी पहले का है। 1940 के दशक में, मुंबई (तब बॉम्बे) में कॉटन (कपास) के व्यापार से जुड़े बड़े सटोरिये न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज से बॉम्बे कॉटन एक्सचेंज में भेजे जाने वाले कपास के खुलने और बंद होने के दामों पर दांव लगाते थे।
1960 के दशक में जब न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज ने इस प्रथा को बंद कर दिया, तो इस खेल को जीवित रखने के लिए प्रसिद्ध सट्टा संचालक कल्याणजी भगत और रतन खत्री ने एक नई प्रणाली शुरू की। इस प्रणाली के तहत, कागज की पर्चियों पर 0 से 9 तक के अंक लिखकर एक बड़े मिट्टी के घड़े (मटके) में डाल दिए जाते थे। इसके बाद कोई व्यक्ति मटके से पर्ची निकालता था और जीतने वाले अंक की घोषणा होती थी। घड़े का उपयोग होने के कारण ही इस खेल का नाम "मटका" पड़ा।
भारत में विभिन्न शहरों और बाजारों के नाम पर कई प्रकार के सट्टा खेल खेले जाते हैं। इनमें सबसे प्रमुख और लोकप्रिय बाजार निम्नलिखित हैं:
सट्टा किंग को खेलने के लिए तीन बुनियादी नियमों और दांव लगाने के तरीकों को समझना जरूरी है:
अनुभवी खिलाड़ी सट्टा चार्ट (Satta Record Charts) का गहरा विश्लेषण करके "लीक जोड़ी" या संभावित लकी नंबर निकालने का प्रयास करते हैं, जिसे सट्टा गणित या सट्टा ट्रिक भी कहा जाता है।
भारत में सार्वजनिक जुआ अधिनियम 1867 (Public Gambling Act 1867) के तहत सट्टेबाजी और जुआ खेलना पूरी तरह से प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है। अधिकांश भारतीय राज्यों में लॉटरी और सट्टे के खेल गैर-कानूनी हैं।
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